140+ Best Jaun Elia Shayari | जॉन एलिया शायरी 2026
जॉन एलिया शायरी अपनी गहरी सोच, दर्द, मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी की कड़वी सच्चाइयों को बेहद खूबसूरत अंदाज़ में बयां करने के लिए जानी जाती है। उनकी शायरी में इश्क़ की नाकामी, अधूरी मोहब्बत, अकेलापन, बेवफाई और रिश्तों की उलझनों जैसे एहसासों की गहराई देखने को मिलती है। अगर आप Jaun Elia Shayari in Hindi, जॉन एलिया की शायरी, Jaun Elia Sad Shayari और दिल को छू लेने वाली मोहब्बत की शायरी तलाश रहे हैं, तो यहां आपको उनके अंदाज़ से प्रेरित बेहतरीन शायरी का संग्रह मिलेगा।
ये शायरी उन लोगों के लिए खास है जो अपने दिल की खामोशी, दर्द और भावनाओं को खूबसूरत शब्दों में व्यक्त करना चाहते हैं। आप इन Jaun Elia Shayari को पढ़ने के साथ-साथ अपने दोस्तों और खास लोगों के साथ भी शेयर कर सकते हैं।
Jaun Elia Shayari

हमला है चार सू दर-ओ-दीवार-ए-शहर का
सब जंगलों को शहर के अंदर समेट लो!!
मुझ को ये होश ही न था तू मिरे बाज़ुओं में है
यानी तुझे अभी तलक मैं ने रिहा नहीं किया!!
अब ख़ाक उड़ रही है यहाँ इंतिज़ार की
ऐ दिल ये बाम-ओ-दर किसी जान-ए-जहाँ के थे!!
हम यहाँ ख़ुद आए हैं लाया नहीं कोई हमें
और ख़ुदा का हम ने अपने नाम पर रक्खा है नाम!!
सारी गली सुनसान पड़ी थी बाद-ए-फ़ना के पहरे में
हिज्र के दालान और आँगन में बस इक साया ज़िंदा था!!
Jaun Elia Shayari Hindi

'जौन' दुनिया की चाकरी कर के
तू ने दिल की वो नौकरी क्या की!!
किया था अहद जब लम्हों में हम ने
तो सारी उम्र ईफ़ा क्यूँ करें हम!!
मैं बिस्तर-ए-ख़याल पे लेटा हूँ उस के पास
सुब्ह-ए-अज़ल से कोई तक़ाज़ा किए बग़ैर!!
हम हैं मसरूफ़-ए-इंतिज़ाम मगर
जाने क्या इंतिज़ाम कर रहे हैं!!
क्या पूछते हो नाम-ओ-निशान-ए-मुसाफ़िराँ
हिन्दोस्ताँ में आए हैं हिन्दोस्तान के थे!!
Jaun Elia Shayari Urdu

फिर उस गली से अपना गुज़र चाहता है दिल
अब उस गली को कौन सी बस्ती से लाऊँ मैं!!
अपने सभी गिले बजा पर है यही कि दिलरुबा
मेरा तिरा मोआ'मला इश्क़ के बस का था नहीं!!
गो अपने हज़ार नाम रख लूँ
पर अपने सिवा मैं और क्या हूँ!!
कौन से शौक़ किस हवस का नहीं
दिल मिरी जान तेरे बस का नहीं!!
इक शख़्स कर रहा है अभी तक वफ़ा का ज़िक्र
काश उस ज़बाँ-दराज़ का मुँह नोच ले कोई!!
Jaun Elia Shayari Book

इक अजब आमद-ओ-शुद है कि न माज़ी है न हाल
'जौन' बरपा कई नस्लों का सफ़र है मुझ में!!
तिरी क़ीमत घटाई जा रही है
मुझे फ़ुर्क़त सिखाई जा रही है!!
हम जो अब आदमी हैं पहले कभी
जाम होंगे छलक गए होंगे!!
हम ने क्यूँ ख़ुद पे ए'तिबार किया
सख़्त बे-ए'तिबार थे हम तो!!
मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस
ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं!!
Jaun Elia Shayari Book in Hindi

शाम हुई है यार आए हैं यारों के हमराह चलें
आज वहाँ क़व्वाली होगी 'जौन' चलो दरगाह चलें!!
ख़ुदा से ले लिया जन्नत का व'अदे
ये ज़ाहिद तो बड़े ही घाग निकले!!
मिल कर तपाक से न हमें कीजिए उदास
ख़ातिर न कीजिए कभी हम भी यहाँ के थे!!
कुछ दर्द ऐसे होते हैं जो कहे नहीं जाते
बस खामोशी में उम्र भर सहे जाते हैं!!
आख़िरी बात तुम से कहना है
याद रखना न तुम कहा मेरा!!
Jaun Elia Shayari in Hindi

अब नहीं मिलेंगे हम कूचा-ए-तमन्ना में
कूचा-ए-तमन्ना में अब नहीं मिलेंगे हम!!
उस से हर-दम मोआ'मला है मगर
दरमियाँ कोई सिलसिला ही नहीं!!
मैं इस दीवार पर चढ़ तो गया था
उतारे कौन अब दीवार पर से!!
ख़ूब है शौक़ का ये पहलू भी
मैं भी बर्बाद हो गया तू भी!!
है वो बेचारगी का हाल कि हम
हर किसी को सलाम कर रहे हैं!!
Jaun Elia Shayari 2 Line

ये ग़म क्या दिल की 'आदत है नहीं तो
किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो!!
मैं सहूँ कर्ब-ए-ज़िंदगी कब तक
रहे आख़िर तिरी कमी कब तक!!
हो कभी तो शराब-ए-वस्ल नसीब
पिए जाऊँ मैं ख़ून ही कब तक!!
उस ने गोया मुझी को याद रखा
मैं भी गोया उसी को भूल गया!!
घर से हम घर तलक गए होंगे
अपने ही आप तक गए होंगे!!
Jaun Elia Shayari Love

तू भी चुप है मैं भी चुप हूँ यह कैसा सन्नाटा है
हम दोनों के बीच मोहब्बत अब भी ज़िंदा है!!
इतना तो कोई पास भी आए न किसी के
जितना मैं तिरे बाअद भी नज़दीक़ हूँ तेरे!!
बे-दिली क्या यूँही दिन गुज़र जाएँगे
सिर्फ़ ज़िंदा रहे हम तो मर जाएँगे!!
एक ही हादसा तो हुआ है और वो ये है
कि मैं आज तक तेरे ग़म से उबर नहीं पाया!!
तुझसे शिकायतें भी कई थीं, गिला भी था
तू आ के सामने मुझे याद कुछ न रहा!!
